अमेरिका और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के मंत्रियों ने बहरीन के मनामा में एक अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान के साथ बातचीत को आसान बनाने में कतर की भूमिका की जमकर तारीफ की गई। दोनों पक्षों ने माना कि कतर की सक्रिय भागीदारी की वजह से कूटनीतिक कोशिशों को मजबूती मिली है।

25 जून 2026 को हुई इस मीटिंग के बाद 26 जून को एक साझा बयान जारी किया गया। इसमें अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को हुए समझौते (MOU) का स्वागत किया गया। यह समझौता साढ़े तीन महीने के तनाव और टकराव के बाद संभव हो पाया था।

अब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के जोखिम को कम करने के लिए दोहा में एक सीधा संपर्क माध्यम (Military deconfliction channel) बनाया गया है। इसमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अफसर शामिल होंगे। इसकी पुष्टि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने की है।

बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका GCC देशों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दो बड़ी शर्तें रखीं कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र रहेगा और वहां कोई फीस नहीं ली जाएगी, साथ ही ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा।

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इस समझौते का स्वागत किया और आने वाली बातचीत का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए ईरान के साथ बातचीत बहुत जरूरी है। वहीं कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल अंसारी ने बताया कि कतर ने तनाव कम करने के लिए पूरी कोशिशें की हैं।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और GCC के इस साझा बयान को गलत और उकसाने वाला बताया। ईरान ने कहा कि अमेरिका अपनी पुरानी और गलत बातें दोहरा रहा है और GCC देशों को अपनी सुरक्षा नीति पर फिर से सोचना चाहिए।

Sushma Kumari

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