अमेरिका और जर्मनी के बड़े नेताओं ने वाशिंगटन में एक अहम मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MoU) और समुद्र के रास्ते की सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने कोशिश की कि दुनिया में शांति बनी रहे और ईरान जैसा देश परमाणु हथियार न बना सके।
वाशिंगटन में मंगलवार, 30 जून 2026 को जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul और अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने मुलाकात की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र अमेरिका और ईरान के बीच हुआ वह समझौता था जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले रोकने और बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इसे मौजूदा हालात में कूटनीति के लिए एक बड़ा मौका माना जा रहा है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्ती
बैठक के दौरान यह बात साफ की गई कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। अमेरिकी मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका और जर्मनी दोनों इस बात पर सहमत हैं कि ईरान कभी भी परमाणु ताकत न बने। वहीं, जर्मनी के मंत्री Wadephul ने जोर देकर कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब कभी दुनिया के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए और इसका स्थायी समाधान निकलना जरूरी है।
Strait of Hormuz और समुद्री सुरक्षा
दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर भी गहरी चिंता जताई। Wadephul ने कहा कि इस समुद्री रास्ते को फिर से बिना किसी रोक-टोक के चलाने लायक बनाना होगा ताकि व्यापार प्रभावित न हो। उन्होंने ईरान की इस रणनीति को जोखिम भरा बताया जिससे समुद्री सुरक्षा पर खतरा बढ़ता है।
बैठक की अन्य मुख्य बातें
- समझौता: अमेरिका और ईरान के बीच आपसी हमलों को रोकने और बातचीत शुरू करने के फैसले को जर्मनी ने एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
- नाटो (NATO): बैठक में NATO देशों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे (Burden-sharing) पर भी चर्चा हुई।
- रूस-यूक्रेन: दोनों नेताओं ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के तरीकों पर बात की।
बता दें कि इस मुलाकात से पहले जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा था कि अमेरिका यूरोप के बाहर उनका सबसे महत्वपूर्ण पार्टनर है। हालांकि, इसी बीच ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बैठक की खबरों से साफ इनकार किया है।
