अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी House of Representatives ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। यहाँ एक ऐसे प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया जो राष्ट्रपति को ईरान पर सैन्य हमले करने से रोकने की कोशिश कर रहा था। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बिना कांग्रेस की मंजूरी के भी सैन्य कार्रवाई जारी रख सकेंगे।
संसद में क्या हुआ और यह कानून क्या था?
16 अप्रैल 2026 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। इसमें 214 सदस्यों ने विरोध किया और 213 ने समर्थन किया, जिससे यह प्रस्ताव गिर गया। यह पूरा मामला 1973 के War Powers Resolution से जुड़ा था। इस नियम के मुताबिक राष्ट्रपति को सेना भेजने के 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को बताना होता है और बिना मंजूरी के 60 दिनों में सेना वापस बुलानी होती है।
नेताओं ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
रिप्रेसेंटेटिव ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना मंजूरी के देश को युद्ध में झोंक दिया है और संविधान के मुताबिक युद्ध का फैसला कांग्रेस को लेना चाहिए। वहीं रिप्रेसेंटेटिव ब्रायन मास्ट का मानना था कि राष्ट्रपति ईरान के परमाणु खतरे से देश का बचाव कर रहे थे। जॉन बी लार्सन ने राष्ट्रपति की धमकियों और सैनिकों के लिए किसी स्पष्ट रणनीति न होने पर सवाल उठाए।
ईरान और अमेरिका विवाद का घटनाक्रम
इस पूरे विवाद और हाल की घटनाओं की जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए |
| 7 अप्रैल 2026 | अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम शुरू हुआ |
| 11 अप्रैल 2026 | इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत विफल रही |
| 15 अप्रैल 2026 | अमेरिकी सीनेट ने सैन्य हमलों को रोकने का प्रस्ताव खारिज किया |
| 16 अप्रैल 2026 | हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया |
| 16 अप्रैल 2026 | राष्ट्रपति ट्रंप ने इसराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम घोषित किया |
