US Iran Conflict: अमेरिका में ईरान पर हमले रोकने का प्रस्ताव फेल, राष्ट्रपति ट्रंप अब बिना मंजूरी के कर सकेंगे हमला
अमेरिका की संसद यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक ऐसा प्रस्ताव खारिज कर दिया है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने से रोकने के लिए लाया गया था। इस प्रस्ताव का मकसद यह था कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के ईरान पर कोई नया सैन्य हमला न किया जाए। इस वोटिंग के बाद अब राष्ट्रपति के पास सैन्य कार्रवाई करने की ताकत बनी रहेगी।
इस वोटिंग में क्या हुआ और किसने किसका साथ दिया?
16 अप्रैल 2026 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। यह मुकाबला बहुत करीबी था और नतीजा 214-213 या 213-214 के मामूली अंतर से निकला। डेमोक्रेट्स ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था ताकि युद्ध की शक्तियों पर कांग्रेस का नियंत्रण रहे, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों का साथ दिया। रिपब्लिकन नेता ब्रायन मास्ट ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था।
वॉर पावर्स एक्ट क्या है और यह मामला क्यों उठा?
यह पूरा विवाद 1973 के वॉर पावर्स एक्ट को लेकर है। इस कानून के मुताबिक, राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य अभियान को 60 दिनों के बाद बंद करना होता है, जब तक कि कांग्रेस उसकी मंजूरी न दे दे। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।
ईरान और अमेरिका विवाद से जुड़ी अन्य बड़ी बातें
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सीनेट का फैसला | 15 अप्रैल को सीनेट ने भी इसी तरह का प्रस्ताव खारिज कर दिया |
| सीजफायर | 7 अप्रैल से दोनों देशों के बीच नाजुक युद्धविराम चल रहा है |
| समुद्री नाकाबंदी | US सेंट्रल कमांड ने ईरान के समुद्री व्यापार को रोक रखा है |
| चीन पर दबाव | अमेरिकी ट्रेजरी ने चीन के बैंकों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है |
| व्हाइट हाउस का बयान | करोलिन लीविट ने कहा कि बातचीत जारी है और सकारात्मक है |
| सैनिक कार्रवाई | 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे |