अमेरिकी संसद (House of Representatives) ने राष्ट्रपति Donald Trump की ईरान नीति को एक बड़ी चुनौती दी है। बुधवार, 3 जून 2026 को संसद में एक अहम प्रस्ताव पास किया गया, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकना है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विपक्ष में 208 वोट पड़े। चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी पार्टी से अलग जाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिससे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

क्या है यह युद्ध प्रस्ताव और ट्रंप पर क्या हैं आरोप?

अमेरिकी संसद ने ‘War Powers Resolution of 1973’ के तहत यह कदम उठाया है। इस नियम के अनुसार, राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी के बिना किसी भी देश में सैन्य कार्रवाई जारी रखने की अनुमति नहीं होती है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने बिना संसद की अनुमति के ईरान पर हमले शुरू करके संविधान का उल्लंघन किया है। युद्ध की 60 दिनों की कानूनी समय सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है। दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस का कहना है कि अप्रैल 2026 में हुए युद्धविराम की वजह से यह नियम इस मामले में लागू नहीं होता है।

इस फैसले पर अमेरिकी नेताओं की क्या रही प्रतिक्रिया?

इस मतदान को रोकने की कोशिश करने वाले हाउस स्पीकर Mike Johnson ने ट्रंप का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने 47 साल पहले हमारे खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी और राष्ट्रपति केवल देश के लोगों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक नेता Hakeem Jeffries ने इस युद्ध को बेहद खर्चीला और लापरवाह बताया। विदेश मंत्री Marco Rubio ने चेतावनी दी कि इस फैसले से ईरान को लगेगा कि अमेरिका के हाथ बंध गए हैं, जिससे बातचीत में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि तेहरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है और जल्द ही समझौता हो सकता है जिसके बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा।

जंग का आम जनता और कुवैत जैसे देशों पर क्या पड़ा असर?

इस संघर्ष के कारण केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि आम जनता की जेब पर भी भारी असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.26 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। पेंटागन के अनुसार, इस सैन्य अभियान में करीब 29 बिलियन डॉलर का खर्च आया है। इस तनाव का असर कुवैत पर भी देखा गया है, जहां हवाई अड्डे सहित कई महत्वपूर्ण जगहों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए। इसके बाद कुवैत ने दो ईरानी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश भी दिया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिकी संसद में पास हुए इस प्रस्ताव का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि संसद राष्ट्रपति को बिना उसकी मंजूरी के किसी दूसरे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से रोकना चाहती है। हालांकि, इसे अंतिम रूप से लागू करने के लिए सीनेट की मंजूरी भी जरूरी होगी।

इस जंग के कारण आम लोगों पर क्या आर्थिक प्रभाव पड़ा है?

इस तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन के दाम बढ़े हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत बढ़कर औसतन 4.26 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है।