अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी US House of Representatives ने बुधवार, 3 जून 2026 को ईरान के साथ जारी जंग को रोकने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव पास कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस युद्ध को 90 दिनों से ज़्यादा का समय हो चुका है और इसमें 100 अरब डॉलर से अधिक का खर्च हो चुका है। खाड़ी देशों में भी इसका असर दिख रहा है, जहां कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हाल ही में हमला हुआ है।

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अमेरिकी संसद में वोटिंग के दौरान क्या हुआ?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव को लेकर कड़ी बहस हुई। इसके बाद हुई वोटिंग में प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। इस प्रस्ताव में 1973 के वॉर पावर्स रेजोल्यूशन का इस्तेमाल किया गया है। इस नियम के अनुसार, यदि अमेरिकी कांग्रेस युद्ध की आधिकारिक मंजूरी नहीं देती है, तो राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर अपनी सेना को वापस बुलाना होता है। ईरान के साथ चल रहे इस सैन्य संघर्ष में यह 60 दिनों की समयसीमा 1 मई को ही समाप्त हो चुकी है। डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर चार रिपब्लिकन सांसदों थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

इस फैसले पर अमेरिकी नेताओं और राष्ट्रपति ट्रंप की क्या प्रतिक्रिया है?

डेमोक्रेटिक नेताओं ने सीनेट से भी इस प्रस्ताव को जल्द पास करने की अपील की है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में फंस गया है जो खत्म नहीं हो रहा है, और कूटनीति ही इससे बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है। वहीं डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ्रीस ने कहा कि इस बिना सोचे-समझे शुरू किए गए और महंगे युद्ध को आज ही समाप्त होना चाहिए।

दूसरी तरफ, रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट ने इस वोट को एक राजनीतिक कदम बताया और कहा कि इससे ईरान के साथ बातचीत में राष्ट्रपति के हाथ कमजोर होंगे। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है और वीकेंड तक कोई समझौता हो सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में अमेरिका ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम पर नियंत्रण की मांग करेगा और कूटनीति विफल होने पर सैन्य विकल्प अभी भी खुले हैं।

युद्ध का खाड़ी देशों और कुवैत पर क्या असर हुआ?

ईरान के साथ चल रहा यह विवाद अब खाड़ी देशों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। 3 जून 2026 को कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले हुए, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं। कुवैत की सेना ने जानकारी दी है कि उन्होंने कई हमलों को हवा में ही रोक दिया। इससे पहले 2 जून को अमेरिकी सेना ने भी खाड़ी क्षेत्र में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम करने का दावा किया था। अब इस प्रस्ताव को अमेरिकी सीनेट में भेजा जाएगा, जहां इस पर आगे का फैसला होना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

US House में युद्ध रोकने का प्रस्ताव कितने वोटों से पास हुआ?

यह प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 वोटों से पास हुआ है, जिसमें चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया है।

वॉर पावर्स रेजोल्यूशन कानून क्या है?

1973 के इस कानून के तहत यदि अमेरिकी संसद युद्ध को मंजूरी नहीं देती है, तो राष्ट्रपति को सैन्य बलों को 60 दिनों के भीतर वापस बुलाना पड़ता है।

क्या इस युद्ध का असर कुवैत पर भी पड़ा है?

हां, 3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की खबर है।