अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान के युद्ध के बीच दुनिया भर में तेल की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिका का ऊर्जा विभाग (US Energy Department) अगले हफ्ते से अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल की सप्लाई शुरू करेगा। यह सप्लाई अगले चार महीनों तक चलेगी जिसमें 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारा जाएगा। यह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के उस बड़े प्लान का हिस्सा है जिसके तहत 32 देश मिलकर 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में ला रहे हैं। इस फैसले से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीद है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया में ऊर्जा का बड़ा संकट आ गया था। कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इस फैसले के आते ही कच्चे तेल की कीमत घटकर लगभग 87.25 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि इस कदम से लोगों को महंगाई से राहत मिलेगी और सप्लाई चेन ठीक होगी। IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने भी इसे बाजार को स्थिर करने के लिए एक जरूरी कदम बताया है।

कौन सा देश दे रहा है कितना तेल?

इस इमरजेंसी प्लान के तहत IEA के 32 देशों ने सर्वसम्मति से 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने पर सहमति जताई है। यह IEA के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फैसला है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका का है। अन्य प्रमुख देशों का योगदान इस प्रकार है:

  • अमेरिका: 172 मिलियन बैरल
  • जापान: 80 मिलियन बैरल
  • दक्षिण कोरिया: 22.46 मिलियन बैरल
  • जर्मनी: 19.7 मिलियन बैरल
  • फ्रांस: 14.5 मिलियन बैरल
  • ब्रिटेन: 13.5 मिलियन बैरल

क्या है युद्ध का ताज़ा अपडेट?

28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध में अब तक ईरान में 15,000 से अधिक ठिकानों पर हमले हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को तबाह करने की पुष्टि की है। हालांकि तेल के बुनियादी ढांचे को अभी के लिए छोड़ दिया गया है ताकि बाजार में और अधिक उथल-पुथल न मचे। वहीं ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी जारी रखी है और पिछले 48 घंटों में कम से कम तीन कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.