अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत का नया शुल्क लागू कर दिया है। यह फैसला ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत लिया गया है, जिसके पीछे अमेरिका ने ‘जबरन मजदूरी’ (forced labor) की चिंता जताई है। यह नियम 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके चलते अब भारत के करीब 70 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
निर्यात पर क्या होगा असर
इस फैसले के दायरे में इंजीनियरिंग का सामान, कपड़ा, प्लास्टिक, लेदर, फर्नीचर और ज्वेलरी जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन सामानों को अब सामान्य शुल्क के साथ-साथ यह 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी देना होगा। अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एंबेसडर Jamieson Greer ने कहा है कि ग्लोबल सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
भारत के ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने इस नए शुल्क पर सवाल खड़े किए हैं। थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका के पास इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि भारतीय सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल होता है। GTRI के अनुसार, यह कदम केवल व्यापारिक बाधाएं पैदा करने के लिए उठाया गया है। भारत ने अपने फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में भी पहले ही जबरन मजदूरी से बने सामानों को आयात करने पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद शुल्क को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया था।
