अमेरिका ने जेनेरिक दवाओं के आयात पर एक नई टैरिफ नीति की घोषणा की है, जो 1 अगस्त 2026 से लागू होगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दवाओं के निर्माण को वापस अमेरिका में लाना है, जिसके चलते भारतीय फार्मा सेक्टर में हड़कंप मच गया है। इस खबर के आते ही 22 जुलाई 2026 को शेयर बाजार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी 2 से 2.5 प्रतिशत तक की कमी आई।
📰: UAE में भारतीय पासपोर्ट सेवाओं में बड़ा बदलाव, Alhind ने संभाला काम, अब ऐसे बुक करें अपॉइंटमेंट।
नई टैरिफ नीति और भारत पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘Truth Social’ पर जानकारी दी कि यह कदम अमेरिका में दवा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर 0 प्रतिशत टैरिफ रहेगा। इसके बाद अगस्त 2028 में यह टैरिफ 100 प्रतिशत हो जाएगा और अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
भारतीय दवा उद्योग के जानकारों का कहना है कि इतने भारी शुल्क के साथ काम करना मुश्किल है। Pharmexcil के चेयरमैन Namit Joshi ने बताया कि दवा बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में आमतौर पर 4 से 5 साल का समय लगता है, ऐसे में 2 साल का समय बहुत कम है। उनका मानना है कि कंपनियां या तो लागत बढ़ाएंगी या फिर सप्लाई बंद करने पर मजबूर हो जाएंगी।
जानकारों की राय
हालांकि, बाजार के कुछ जानकारों का नजरिया थोड़ा अलग है। Global Trade Research Initiative (GTRI) के संस्थापक Ajay Srivastava के मुताबिक, भारतीय दवाओं की लागत कम होने के कारण वे अभी भी बाजार में अपनी जगह बनाए रख सकती हैं। वहीं Motilal Oswal Financial Services के Tushar Manudhane ने स्पष्ट किया कि कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में अपनी सब्सिडियरी कंपनियां हैं, इसलिए टैरिफ का असर अंतिम कीमतों के बजाय ट्रांसफर प्राइसिंग पर पड़ सकता है। साथ ही, अमेरिका में बिकने वाली 90 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं आयातित हैं, जिसका मतलब है कि यह फैसला केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के आपूर्तिकर्ताओं पर असर डालेगा।
