UAE और ईरान नेटवर्क पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, 6 कंपनियों और एक व्यक्ति पर लगाए कड़े प्रतिबंध

Sushma Kumari7 August 20262 min read54 viewsUAE
UAE और ईरान नेटवर्क पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, 6 कंपनियों और एक व्यक्ति पर लगाए कड़े प्रतिबंध

अमेरिकी सरकार ने ईरान के शासन को आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोप में एक बड़ी कार्रवाई की है। 7 अगस्त 2026 को अमेरिकी वित्त विभाग के Office of Foreign Assets Control (OFAC) और विदेश विभाग ने मिलकर छह संस्थाओं और एक व्यक्ति को प्रतिबंधित किया है। यह कदम वाशिंगटन की 'मैक्सिमम प्रेशर' और 'इकोनॉमिक फ्यूरी' मुहिम का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के उन नेटवर्क को तोड़ना है जो अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम का गलत फायदा उठा रहे हैं।

प्रतिबंधों के दायरे में आए लोग और कंपनियां

अमेरिकी प्रशासन ने डिजिटल एसेट एक्सचेंज Shelbit Exchange और Aban Tether को अपनी ब्लैकलिस्ट में डाला है। जांच में सामने आया कि Siavash Kayvanpour नाम का व्यक्ति इन सभी गैर-कानूनी गतिविधियों का मुख्य सूत्रधार था। इस पूरे नेटवर्क में पोलैंड की Shelbit Technologies और यूएई स्थित Crypto Home और NFT Home DMCC जैसी कंपनियां शामिल थीं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये कंपनियां क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रही थीं।

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अमेरिकी खजाने का कहना है कि ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 10 लाख डॉलर से ज्यादा की डिजिटल संपत्ति Shelbit को भेजी थी। बाद में यह रकम IRGC से जुड़ी अन्य अकाउंट्स और पहले से प्रतिबंधित Nobitex एक्सचेंज में पहुंचाई गई। इसके अलावा, ईरान के भीतर काम करने वाली Aban Tether ने भी लाखों डॉलर के ट्रांजैक्शन किए जो अन्य प्रतिबंधित प्लेटफार्मों से जुड़े थे।

आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने का संकल्प

अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने इस कार्रवाई पर स्पष्ट किया कि ईरान का डिजिटल संपत्ति और गुप्त बैंकिंग नेटवर्क पर निर्भर रहना यह बताता है कि Economic Fury नीति सही दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन अवैध आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश विभाग के प्रवक्ता Tommy Pigott ने इसे ट्रंप प्रशासन की ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति का हिस्सा बताया।

अमेरिकी प्रशासन ने इन प्रतिबंधों को सीधे तौर पर फारस की खाड़ी यानी Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर हुए हालिया हमलों से जोड़ा है। सरकार के इस फैसले का असर इन कंपनियों की अमेरिकी संपत्ति पर पड़ेगा और किसी भी संस्था को इनके साथ लेनदेन करने से पहले सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है। OFAC ने यह भी साफ किया है कि इन कंपनियों में 50% या उससे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली संस्थाओं को भी ब्लॉक किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आप अमेरिकी वित्त विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति देख सकते हैं।

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