अमेरिका मध्य पूर्व (Middle East) में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। यह कदम बढ़ते तनाव और सुरक्षा हालातों को देखते हुए उठाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में इस इलाके की स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।

तैनाती की पूरी डिटेल और सैन्य ताकत

पेंटागन ने आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में भारी संख्या में सैनिक भेजने की तैयारी की है। ये नए सैनिक वहां पहले से मौजूद लगभग 50,000 अमेरिकी कर्मियों के साथ जुड़ेंगे। तैनाती की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

सैन्य यूनिट / जहाज सैनिकों की अनुमानित संख्या विवरण
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश 6,000 विमानवाहक पोत और युद्धपोत
बॉक्सर एम्फीबियस रेडी ग्रुप 4,200 (कुल) 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के साथ
कुल मौजूदा बल 50,000 क्षेत्र में पहले से तैनात कर्मी
अन्य शामिल यूनिट 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और मरीन कोर

ईरान पर नाकाबंदी और कूटनीतिक हालात

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकाबंदी की घोषणा की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में छह व्यापारिक जहाजों को रोका गया और उन्हें ईरान के बंदरगाह पर वापस भेज दिया गया।

वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में हुई बातचीत विफल रही। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यह बातचीत अगले दो दिनों के भीतर संभवतः पाकिस्तान में फिर से शुरू हो सकती है। बता दें कि दो सप्ताह का संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।

ईरान की जवाबी तैयारी और चीनी जासूसी उपग्रह

एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान ने गुप्त रूप से चीन से एक जासूसी उपग्रह प्राप्त किया है। इस उपग्रह की मदद से ईरान अब मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी करने में सक्षम हो गया है।

दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उनके पूर्ण नियंत्रण में है। उन्होंने चेतावनी दी है कि गैर-सैन्य जहाजों के लिए रास्ता खुला है, लेकिन सैन्य जहाजों को जोरदार प्रतिक्रिया मिलेगी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने सभी विकल्पों को खुला रखा है और अमेरिका की रेडलाइन स्पष्ट है।