भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर तनाव दिख रहा है। ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत ने सालों तक निवेश किया, लेकिन अब अमेरिका ने इस पर दी गई छूट खत्म कर दी है। इस फैसले की वजह से भारत के सामने अब बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है और यह प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है।
चाबहार पोर्ट पर अमेरिका ने क्या नया नियम लागू किया है?
अमेरिका ने भारत को चाबहार पोर्ट के काम के लिए जो विशेष छूट दी थी, वह 26 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई। इस प्रोजेक्ट के लिए 2018 में छूट दी गई थी ताकि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद मिल सके। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने 16 सितंबर 2025 को इसे रद्द कर दिया था, जिसके बाद ट्रेजरी विभाग ने एक अस्थायी छूट 26 अप्रैल 2026 तक दी थी।
- टैरिफ की धमकी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2026 से अपना रुख सख्त कर लिया है।
- नया नियम: ट्रंप ने ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा।
- ब्लॉकेड रूट: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नौसैनिक नाकाबंदी का भी आदेश दिया है।
भारत इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कन्फर्म किया है कि चाबहार पोर्ट के मुद्दे पर ईरान और अमेरिका दोनों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संघर्ष की वजह से यह मामला और ज्यादा उलझ गया है।
खबरों के मुताबिक, भारत इस जोखिम को कम करने के लिए कुछ विकल्पों पर विचार कर रहा है। भारत अपनी हिस्सेदारी को कुछ समय के लिए किसी ईरानी इकाई को ट्रांसफर कर सकता है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। हालांकि, भारत सरकार इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर होने का इरादा नहीं रखती है। नवंबर 2025 से ही भारत ने अपने कर्मियों को वहां से हटाना शुरू कर दिया था और अपने 120 मिलियन डॉलर के निवेश का भुगतान भी पहले ही कर दिया था।
चाबहार पोर्ट भारत और अन्य देशों के लिए क्यों जरूरी है?
चाबहार पोर्ट का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान के विकास और व्यापार को बढ़ावा देना था। इस पोर्ट की मदद से भारत मध्य एशिया के देशों तक आसानी से पहुंच सकता है और उसे पाकिस्तान के रास्ते जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ईरान के राजनयिकों का कहना है कि भारत का निवेश मौजूदा समझौतों के हिसाब से आगे बढ़ सकता है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिका के कड़े कदमों से ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने चाबहार पोर्ट की छूट कब खत्म की?
अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई।
भारत ने चाबहार प्रोजेक्ट में कितना निवेश किया है?
भारत ने इस प्रोजेक्ट में 120 मिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी, जिसका भुगतान पहले ही किया जा चुका है।