भारत और अमेरिका के बीच तेल को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने फिनलैंड में एक बड़ा खुलासा किया है कि अमेरिका ने ही भारत से रूसी तेल खरीदने को कहा था ताकि ग्लोबल मार्केट स्थिर रहे, लेकिन बाद में उसी के लिए भारत पर टैक्स लगा दिए। उन्होंने यूरोपीय देशों के दोहरे रवैये पर भी कड़े सवाल उठाए हैं।
अमेरिका का दोहरा रवैया और भारत का जवाब
विदेश मंत्री S Jaishankar ने बताया कि अमेरिका ने शुरू में भारत से रूसी तेल खरीदने का अनुरोध किया था ताकि दुनिया भर के बाजारों में तेल की कीमतों को कंट्रोल किया जा सके। लेकिन बाद में अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगा दिए। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा की ज़रूरतें केवल अपने राष्ट्रीय हित और घरेलू सुरक्षा को ध्यान में रखकर पूरी करती है।
यूरोप के पाखंड पर उठाए सवाल
S Jaishankar ने यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए उन्हें ‘पाखंडी’ बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप के देश ऊर्जा और हथियारों की बिक्री को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। भारत की रणनीति यह है कि वह तेल के लिए किसी एक देश पर निर्भर न रहकर अलग-अलग जगहों से तेल खरीदे ताकि वह सस्ता और भरोसेमंद हो।
टैरिफ और छूट से जुड़ा पूरा घटनाक्रम
अमेरिका और भारत के बीच तेल और टैक्स को लेकर पिछले कुछ समय में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| तारीख | महत्वपूर्ण घटना/अपडेट |
|---|---|
| अगस्त 2025 | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल आयात के कारण भारतीय सामानों पर कुल 50% टैरिफ लगाया |
| 7 फरवरी 2026 | अमेरिका ने भारत पर लगा 25% टैरिफ हटाया, भारत ने अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने की सहमति दी |
| 6 मार्च 2026 | US ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी |
| 24 मई 2026 | S Jaishankar ने भारत की ऊर्जा रणनीति को सस्ता और भरोसेमंद बताया |
| 3 जून 2026 | अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त 12.5% टैरिफ लगाने और तेल छूट खत्म करने पर चर्चा हुई |
| 12 जून 2026 | S Jaishankar ने फिनलैंड में खुलासा किया कि US ने ही पहले रूसी तेल खरीदने को कहा था |
भविष्य की स्थिति
फिलहाल यह चर्चा चल रही है कि रूसी तेल के लिए दी गई छूट 17 जून 2026 तक खत्म हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप प्रशासन इन छूटों को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है। वहीं भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका को एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद स्रोत मानता है लेकिन अपनी शर्तों पर काम करेगा।
