अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी पहल हुई है. दोनों देशों ने एक समझौते के ढांचे पर सहमति जताई है, जिसके बाद अब 60 दिनों की बातचीत का दौर आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है. इस फैसले से दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने गुरुवार को बताया कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत 18 जून से शुरू हो गई है. इससे ठीक एक दिन पहले यानी 17 जून को दोनों देशों ने समझौते पर दस्तखत किए थे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को ही इस डील की जानकारी दे दी थी. व्हाइट हाउस का लक्ष्य है कि इस समझौते का पूरा दस्तावेज़ शुक्रवार, 19 जून तक जारी कर दिया जाए.
बातचीत का तरीका और शर्तें
इस डील को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यह समय सीमा पत्थर की लकीर नहीं है और आपसी सहमति से इसे बढ़ाया जा सकता है. इस समझौते को लागू करने के लिए तकनीकी बातचीत 20 और 21 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकती है.
उपराष्ट्रपति Vance ने साफ किया कि ईरान को मिलने वाले फायदें उसके व्यवहार पर निर्भर करेंगे. अमेरिका चाहता है कि ईरान आतंकवाद को पैसा देना बंद करे और परमाणु हथियारों की होड़ खत्म करे. उन्होंने दावा किया कि ईरान का परमाणु हथियार प्रोग्राम अब खत्म हो चुका है. अमेरिका ईरान को अपनी रक्षा के लिए हथियार रखने की अनुमति देगा, लेकिन वह ऐसी मिसाइलें नहीं बना सकता जिससे पूरी दुनिया को खतरा हो.
आम लोगों और व्यापार पर असर
इस समझौते का सबसे बड़ा असर समुद्र के रास्तों पर पड़ा है. उपराष्ट्रपति Vance ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया गया है, जिससे व्यापार आसान होगा. हाल ही में यहां से 12.5 मिलियन बैरल तेल गुजरा है, जो संघर्ष शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा है. अमेरिकी नौसेना ने भी ईरान के बंदरगाहों पर जहाजों को आने की अनुमति दे दी है, जिससे नाकाबंदी खत्म हो गई है.
प्रमुख बातें और मध्यस्थ
- मध्यस्थ देश: इस डील को करवाने में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है.
- अमेरिकी टीम: इस बातचीत में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शामिल हैं.
- ईरानी पक्ष: ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
- जांच: अमेरिका का न्याय विभाग ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के निवेश पोर्टफोलियो की जांच कर रहा है.