अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खत्म होने की कगार पर पहुंच सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को बताया है कि दोनों देश एक समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन बातचीत बेहतर होती जा रही है। हालांकि, तनाव खत्म करने के इस रास्ते में अभी भी कई पेंच फंसे हुए हैं और ट्रंप ने रविवार तक इस पर अंतिम फैसला लेने की बात कही है।

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अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में क्या है खास?

दोनों देशों के बीच एक सहमति पत्र यानी MOU पर बातचीत चल रही है, जिसका उद्देश्य चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है। इस बातचीत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सीजफायर बढ़ाना: Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश मौजूदा सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
  • Strait of Hormuz: इस समझौते के तहत जहाजों के आवागमन के लिए Strait of Hormuz को धीरे-धीरे फिर से खोला जाएगा।
  • राजनयिकों की राय: US Secretary of State Marco Rubio ने भारत में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और जल्द ही इस पर कोई बड़ी खबर आ सकती है।

ट्रंप की चेतावनी और ईरान का कड़ा रुख क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि समझौते की 50-50 संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि या तो एक अच्छा समझौता होगा या फिर युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा। ट्रंप रविवार, 24 मई 2026 तक इस पर अपना अंतिम फैसला ले सकते हैं।

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा है कि वर्तमान बातचीत का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना है। इस समझौते में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना एक प्रमुख शर्त है। ईरान ने साफ कर दिया है कि इसमें परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। ईरान ने चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल की तरफ से दोबारा हमले हुए, तो युद्ध नए क्षेत्रीय मोर्चों तक फैल जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर जैसे देश सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हो रही है?

नहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, वर्तमान बातचीत का फोकस केवल युद्ध को समाप्त करने पर है। इसमें परमाणु मुद्दे शामिल नहीं हैं।

इस समझौते में कौन से देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं?

इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच मतभेदों को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।