अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौता हुआ है। सऊदी अरब, UAE, कुवैत और कतर जैसे Gulf देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है। इन देशों का मानना है कि इस कदम से इलाके में शांति लौटेगी और टकराव कम होगा।
यह समझौता 14-15 जून 2026 के आसपास घोषित किया गया, जिसे Memorandum of Understanding (MOU) कहा गया है। इस समझौते के तहत 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने (ceasefire) का फैसला लिया गया है। सबसे जरूरी बात यह है कि Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया गया है ताकि समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने 24-25 जून 2026 को अबू धाबी, कुवैत और बहरीन का दौरा किया। उन्होंने Gulf देशों को भरोसा दिलाया कि अमेरिका उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेगा। उन्होंने साफ कहा कि इस डील से Gulf देशों की सुरक्षा और स्थिरता में कोई कमी नहीं आएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने की ईरान की मांग का अमेरिका विरोध करता है।
राष्ट्रपति Donald Trump ने इन बातचीत पर भरोसा जताया और कहा कि ईरान अब बड़ी रियायतें दे रहा है। दूसरी तरफ, ईरान ने इस समझौते को अपनी जीत बताया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि मिडिल ईस्ट की सुरक्षा क्षेत्र के देशों द्वारा ही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जानकारों का मानना है कि Gulf देशों ने इस समझौते का स्वागत भरोसे की वजह से नहीं, बल्कि हालात को देखते हुए किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस डील में ईरान के मिसाइल, ड्रोन और उसके सहयोगी लड़ाकू समूहों जैसे बड़े सुरक्षा मुद्दों पर कोई ठोस बात नहीं हुई है। कुछ जानकारों के मुताबिक, ईरान ने यह फैसला अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और सैन्य बढ़त को मजबूत करने के लिए लिया है।
अब आने वाले समय में स्विट्जरलैंड में दोबारा तकनीकी बातचीत हो सकती है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुख्य मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
