फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात की है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता कराने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों की सराहना की है। मैक्रॉन ने कहा कि फ्रांस इस समझौते और सीजफायर वार्ता का पूरा समर्थन करने के लिए तैयार है। इस बातचीत के बाद मध्य पूर्व में शांति बहाली की उम्मीदें बढ़ गई हैं और कई अन्य देशों से भी इस बारे में संपर्क किया गया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत में क्या कहा?
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने 31 मई 2026 की रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात की थी। इसके बाद 1 जून को उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बातचीत की जानकारी दी। मैक्रॉन ने ट्रम्प के प्रयासों को एक बेहतरीन अवसर बताया जिससे क्षेत्र में लंबे समय के लिए सुरक्षा और स्थिरता आ सकती है। फ्रांस ने इस समझौते को जमीन पर उतारने और इसे लागू करने में अपनी पूरी भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और लेबनान को लेकर क्या है पूरी योजना?
फ्रांस ने इस बातचीत के दौरान एक बड़ा प्रस्ताव भी रखा है। फ्रांस के अनुसार, समझौता होने के बाद वह ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय मिशन भेजने के लिए तैयार है। यह मिशन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही मैक्रॉन ने लेबनान में भी तुरंत सीजफायर की जरूरत पर जोर दिया है और वहां की सरकार का समर्थन करने की बात कही है।
ईरान और अन्य अरब देशों का इस पर क्या रुख है?
मैक्रॉन ने इस मुद्दे को लेकर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद, ओमान के सुल्तान और मिस्र के राष्ट्रपति से भी चर्चा की है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने बताया है कि अमेरिका के साथ बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान अभी चल रहा है। लेकिन उनका मानना है कि जब तक कोई ठोस नतीजा नहीं आ जाता, तब तक किसी अंतिम फैसले पर नहीं पहुंचा जा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फ्रांस के राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रम्प से किस मुद्दे पर बात की है?
इमैनुएल मैक्रॉन ने डोनाल्ड ट्रम्प से अमेरिका और ईरान के बीच जल्द से जल्द समझौता कराने और शांति स्थापित करने के प्रयासों पर चर्चा की है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा के लिए फ्रांस ने क्या प्रस्ताव दिया है?
फ्रांस ने ब्रिटेन और अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय मिशन तैनात करने की बात कही है ताकि इस समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षा की जा सके।
