अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है, जिससे दुनिया भर के तेल बाजार और जहाजों के आने-जाने वाले रास्ते पर बड़ा असर पड़ा है। इस डील के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया गया है और अमेरिका ने समुद्र में लगाई पाबंदी हटा ली है। इस खबर के आते ही तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।
इस समझौते को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 17 जून 2026 को फ्रांस में G7 समिट के दौरान इस पर दस्तखत किए थे, जबकि ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 18 जून को इस पर साइन किए। इस डील को करवाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और कतर ने अहम भूमिका निभाई है। साथ ही सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी इस कोशिश में साथ दिया।
समझौते की मुख्य बातें और आर्थिक मदद
इस डील में ईरान की आर्थिक हालत सुधारने और समुद्र के रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। नीचे दी गई टेबल में समझौते की अहम जानकारी दी गई है:
| विषय | तय नियम और प्रावधान |
|---|---|
| आर्थिक मदद | ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का प्लान |
| तेल निर्यात | US Treasury ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाएगी |
| जहाजों का रास्ता | शुरुआती 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता मुफ्त रहेगा |
| अमेरिकी पाबंदी | अमेरिका 30 दिनों के भीतर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटा लेगा |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और यूरेनियम के स्टॉक को कम करेगा |
| रास्ते की सफाई | 30 दिनों के भीतर सभी सैन्य और तकनीकी बाधाएं हटाई जाएंगी |
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पुष्टि की है कि यह समझौता तुरंत लागू हो गया है। वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका दोबारा समुद्र में पाबंदी लगा सकता है। ईरान के राष्ट्रपति Pezeshkian ने कहा कि आपसी सम्मान से ही शांति आएगी।
समुद्री यातायात और सुरक्षा की स्थिति
समझौते के बाद गुरुवार सुबह कम से कम 10 कमर्शियल जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते देखा गया। इसमें तीन सऊदी अरब के सुपरटैंकर भी शामिल थे, जो पिछले कई हफ्तों में सबसे बड़ी हलचल है। हालांकि, समुद्री विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि रास्ते में अब भी माइन (बारूदी सुरंगें) बिछी हुई हैं, जिन्हें हटाने में हफ्तों लग सकते हैं।
इस समझौते के तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य लड़ाई रोकने की बात कही गई है। लेकिन इसराइल की सेना ने 18 जून को यह साफ कर दिया कि वह लेबनान में बना रहेगा और हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। ईरान इस कदम को समझौते का उल्लंघन मान सकता है।