ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामनेई ने इस डील को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी राय अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के भरोसे के बाद उन्होंने इसकी अनुमति दी।

क्या है अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता

17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्रांस में G7 समिट के दौरान ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस 14 सूत्रीय समझौते का मुख्य मकसद सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करना है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।

  • Strait of Hormuz: अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली है और अब तेल टैंकर इस रास्ते से गुजर रहे हैं। ईरान ने भी 60 दिनों तक जहाजों को मुफ्त रास्ता देने का फैसला किया है।
  • तेल और पैसा: इस डील के तहत ईरान को अपना तेल बेचने की आजादी मिलेगी और उस पर लगे कुछ वित्तीय प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।
  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कम करने के लिए बातचीत का एक ढांचा तैयार किया गया है, हालांकि ईरान ने साफ किया है कि उसके मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी।
  • पुनर्निर्माण योजना: समझौते में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की एक सशर्त पुनर्निर्माण योजना का जिक्र है।

नेताओं ने क्या कहा

सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के इस वादे पर भरोसा किया कि देश के अधिकारों और रेजिस्टेंस फ्रंट के हितों की रक्षा की जाएगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे अपनी जीत बताया है, लेकिन चेतावनी दी कि अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने साफ किया कि ईरान को उसके जब्त पैसे और प्रतिबंधों से पूरी राहत तुरंत नहीं मिलेगी, यह उनकी ईमानदारी और पालन पर निर्भर करेगा। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और समझौते पर हस्ताक्षर करवाने में मदद की।

अभी की स्थिति क्या है

इस समझौते के बाद अब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में मिलेंगे ताकि अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम निपटारे तक पहुंचा जा सके। हालांकि, इसराइल ने साफ किया है कि वह दक्षिण लेबनान में अपना ऑपरेशन जारी रखेगा ताकि खतरों को खत्म किया जा सके, जिसे ईरान समझौते का उल्लंघन मान रहा है।