अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि ईरान के सैन्य ठिकानों पर शक्तिशाली हमले किए गए हैं। यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह हमला पिछले हमलों के मुकाबले 4 से 5 गुना ज्यादा बड़ा और ताकतवर था। उन्होंने साफ किया कि इसका मकसद ईरान को सजा देना था, न कि केवल उसके हमले का बराबरी से जवाब देना। इस ऑपरेशन में ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें 60 से ज्यादा IRGC की छोटी नावें शामिल थीं।
किन ठिकानों पर हुआ हमला
अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों को तबाह किया है। इनमें मुख्य रूप से ये ठिकाने शामिल थे:
- एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय निगरानी केंद्र
- सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट्स
- एंटी-शिप क्रूज मिसाइल साइट्स
- ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स और पोर्ट सुविधाएं
तेल बेचने पर लगी रोक
सिर्फ सैन्य हमला ही नहीं, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी चोट की है। US Treasury Department ने 7 जुलाई 2026 को ईरान के तेल निर्यात के जनरल लाइसेंस को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद अब ईरान वैश्विक स्तर पर अपना तेल नहीं बेच पाएगा।
जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। इनमें कतर का LNG कैरियर ‘Al Rekayyat’ और सऊदी अरब का टैंकर ‘Vijian’ शामिल थे। UK Maritime Trade Operations Centre (UKMTO) ने इस इलाके में खतरे का स्तर ‘Severe’ यानी गंभीर कर दिया है।
इस पूरे हमले की योजना को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में NATO समिट के दौरान मंजूरी दी थी।
ईरान का क्या कहना है
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम घरिबबादी ने तेल प्रतिबंधों को वापस लागू करने और सैन्य हमलों को समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कोई भी जरूरी कदम उठाएगा।
