अमेरिका ने 19 जुलाई 2026 को ईरान पर लगातार आठवीं रात सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। यह कार्रवाई जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले के जवाब में की गई है। इस हमले में अमेरिका के 2 सैनिकों की मौत हो गई थी, 1 सैनिक लापता है और कई अन्य घायल हुए हैं। राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर ये ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
हमले का मकसद और सरकारी जानकारी
अमेरिकी सेना की CENTCOM ने पुष्टि की है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम करना है। हमले में ईरान के तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोर करने वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, Bandar Abbas, Qeshm Island और Hormozgan प्रांत के इलाकों में धमाकों की आवाज सुनी गई।
बढ़ता तनाव और भविष्य की चिंता
ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तनाव को बढ़ाने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसके जवाब में ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते से हटने की घोषणा की है। हालात को देखते हुए अमेरिका के रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा कि सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। तनाव बढ़ने की आशंका के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने विदेश में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए वर्ल्डवाइड ट्रेवल अलर्ट जारी कर दिया है।
