अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष-विराम का दुनिया भर में स्वागत हो रहा है। ASEAN के विदेश मंत्रियों ने इस कदम की तारीफ की है और इसे स्थायी शांति में बदलने की अपील की है। इसका सबसे बड़ा असर दुनिया के व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ेगा, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य अब सुरक्षित होगा।

🗞️: Israel-Hezbollah Conflict: दक्षिणी लेबनान में Hezbollah की सुरंग को इसराइल ने किया तबाह, IDF ने जारी किया वीडियो

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कब और कैसे हुआ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की शर्त पर दो सप्ताह के संघर्ष-विराम का ऐलान किया था। यह घोषणा 8 अप्रैल, 2026 को की गई थी। इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में 10 अप्रैल, 2026 को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होनी थी। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी सुरक्षित मार्ग की पुष्टि की है।

दुनिया के अन्य देशों और संस्थाओं का क्या कहना है?

इस समझौते पर कई बड़े देशों और संस्थाओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और शांति की उम्मीद जताई है।

संस्था या देश मुख्य प्रतिक्रिया
ASEAN सीजफायर का स्वागत किया और स्थायी शांति की अपील की
भारत पश्चिम एशिया में शांति और नौवहन की आजादी की उम्मीद जताई
संयुक्त राष्ट्र नागरिक जीवन की रक्षा और शत्रुता खत्म करने पर जोर दिया
यूरोपीय संघ समझौते का स्वागत किया और जलडमरूमध्य खोलने को जरूरी बताया

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा क्यों है जरूरी?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के ऊर्जा और व्यापार के लिए एक बहुत अहम रास्ता है। यहाँ से तेल और मालवाहक जहाजों की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है। ASEAN मंत्रियों ने कहा कि यहाँ जहाजों और विमानों का बिना किसी रुकावट के चलना बहुत जरूरी है। सभी पक्षों से समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करने और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।