अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा शांति समझौता अब खतरे में दिख रहा है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने चेतावनी दी है कि यह ceasefire बहुत नाजुक है। एक तरफ पाकिस्तान में दोनों देशों की बातचीत फेल हो गई है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने समुद्र के रास्ते बंद करना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट में फिर से जंग छिड़ने का डर बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ा?
इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी मीटिंग हुई थी, लेकिन यह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका का कहना था कि ईरान अपने परमाणु हथियारों का प्रोग्राम बंद करे, जबकि ईरान ने अमेरिका की मांगों को बहुत ज्यादा बताया। इसी तनाव के बीच 13 अप्रैल को अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की समुद्री नाकाबंदी कर दी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के युद्धपोत इस नाकाबंदी के पास आए, तो उन्हें तबाह कर दिया जाएगा। इसके जवाब में ईरान की गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि अगर उनके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा।
चीन और पाकिस्तान का इस पर क्या कहना है?
चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने पाकिस्तानी डिप्टी पीएम मोहम्मद इसहाक डार से फोन पर बात की। उन्होंने पूरी दुनिया से अपील की कि वे ऐसे किसी भी कदम का विरोध करें जिससे शांति समझौता टूटे या लड़ाई और बढ़े। चीन का मानना है कि इस वक्त सबसे जरूरी यह है कि मिडिल ईस्ट में दोबारा युद्ध शुरू न हो।
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि शांति समझौता अभी कायम है। पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है, ताकि दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच सकें। चीन ने शांति के लिए पांच सूत्रीय पहल का सुझाव भी दिया है।
अब तक की मुख्य घटनाओं की जानकारी
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमला कर युद्ध शुरू किया |
| 8 अप्रैल 2026 | अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का शांति समझौता हुआ |
| 11-12 अप्रैल 2026 | इस्लामाबाद में हुई उच्च स्तरीय बातचीत नाकाम रही |
| 13 अप्रैल 2026 | अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की समुद्री नाकाबंदी शुरू की |
| 13 अप्रैल 2026 | चीन के विदेश मंत्री ने शांति समझौते को नाजुक बताया |
| 22 अप्रैल 2026 | वर्तमान शांति समझौते की समय सीमा समाप्त होगी |
