अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) को लेकर बड़ी उलझन पैदा हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो डील फाइनल होने का ऐलान कर दिया था, लेकिन अब अमेरिकी राजनयिक एलन आयर ने कहा है कि जब तक कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होती, कोई समझौता नहीं माना जाएगा। इस पूरे मामले में इसराइल के हमले का भी बड़ा हाथ बताया जा रहा है।

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राजनयिक एलन आयर ने 15 जून 2026 को बताया कि इसराइल ने बेरूत (Beirut) पर जो हमला किया, उसी की वजह से अमेरिका को आखिरी समय में यह कदम उठाना पड़ा। उनका कहना था कि घोषणा के बावजूद यह डील तब तक पक्की नहीं है जब तक इसे औपचारिक रूप से लागू न कर दिया जाए।

इससे पहले 14 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। उन्होंने कहा था कि अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खोल दिया जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटा ली जाएगी, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में शांति आएगी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस डील की पुष्टि की थी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियान को स्थायी रूप से खत्म करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते पर साइन करने की रस्म शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होगी।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रविवार को साइन करने की बात पर थोड़ा समय मांगा। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी जांच अभी चल रही है, इसलिए अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम घरिबाबदी ने इस डील के संकेत देते हुए इसे ईरान की जीत बताया।

इस पूरी डील का ढांचा पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से तैयार किया गया है। इसमें दो फेज रखे गए हैं। पहले फेज में 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाया जाएगा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा और अमेरिकी नाकाबंदी हटेगी। इसके बाद दूसरे फेज में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी।