अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान में अहम बैठक हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके. अब कई देशों ने मांग की है कि वर्तमान सीज़फ़ायर की अवधि को बढ़ाया जाए ताकि हालात और न बिगड़ें. दुनिया की नज़र अब इस बात पर है कि क्या युद्ध को रोका जा सकेगा या टकराव और बढ़ेगा.

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पाकिस्तान में हुई बातचीत और मुख्य विवाद क्या थे?

इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान की टीमों के बीच आमने-सामने बात हुई. अमेरिका ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने का प्रोग्राम बंद करने को तैयार नहीं है, इसलिए बातचीत विफल रही. वहीं ईरान ने अपनी परमाणु संवर्धन के अधिकार और प्रतिबंध हटाने की मांग रखी. इसराइल द्वारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर किए गए हमलों ने भी इस बातचीत में तनाव बढ़ाया, क्योंकि ईरान इसे सीज़फ़ायर का उल्लंघन मान रहा है.

किन देशों ने सीज़फ़ायर बढ़ाने की कोशिश की?

बातचीत फेल होने के बाद पाकिस्तान, ओमान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने सीज़फ़ायर जारी रखने की अपील की है. ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने कहा कि शांति के लिए दोनों पक्षों को कुछ कठिन फैसले लेने होंगे. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी बातचीत दोबारा शुरू करने और युद्ध रोकने पर ज़ोर दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

दोनों देशों का मौजूदा रुख और आने वाले खतरे

अमेरिका और ईरान के बीच अब टकराव और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि दोनों ने अपनी सख्त शर्तें रख दी हैं और सैन्य तैयारी शुरू कर दी है.

पक्ष मुख्य मांग या फैसला
United States हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी और माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन शुरू करना.
Iran परमाणु अधिकार, प्रतिबंधों की समाप्ति और हॉर्मुज़ पर अपना नियंत्रण रखना.
Pakistan दोनों देशों के बीच मध्यस्थता जारी रखना और संवाद को बढ़ावा देना.
Israel लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखना.