अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अगले 60 दिनों के लिए टल सकता है। दोनों देश सीजफायर यानी युद्धविराम को आगे बढ़ाने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि सऊदी अरब, कतर और यूएई की अपील पर उन्होंने ईरान पर होने वाले नए हमलों को फिलहाल टाल दिया है। इस मामले में शनिवार, 23 मई 2026 को अमेरिकी सुरक्षा कैबिनेट की बैठक होने वाली है, जिसके बाद रविवार तक इस समझौते पर आखिरी फैसला आने की उम्मीद है।

क्या है इस नए समझौते में और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

इस संभावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कई अहम बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। मध्यस्थता करने वाले देशों को उम्मीद है कि इस बार 60 दिनों का सीजफायर मिल सकता है। इससे खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि युद्ध टलने से पूरे क्षेत्र में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना: इस समुद्री रास्ते को धीरे-धीरे व्यापार के लिए फिर से खोला जाएगा, जिससे खाड़ी देशों में तेल की सप्लाई सामान्य हो सकेगी।
  • प्रतिबंधों में राहत: ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी और उसकी विदेशों में जमी संपत्तियों को जारी किया जाएगा।
  • परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत: ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को कम करने या दूसरे देश में भेजने पर भी चर्चा की जाएगी।

अधिकारियों और नेताओं का इस मामले पर क्या कहना है?

अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बयान इस समझौते की स्थिति को साफ करते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और जल्द ही कोई बड़ी खबर आ सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि समझौते की 50-50 संभावना है और बातचीत काफी करीब पहुंच चुकी है।

दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि तेहरान युद्ध को खत्म करने के लिए एक सहमति पत्र पर चर्चा कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मामला केवल ईरान और खाड़ी देशों के बीच का है और इसका अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमिरी मोघदम ने पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देशों की मध्यस्थता की तारीफ की है और उम्मीद जताई है कि इस कूटनीतिक प्रयास से इलाके में स्थायी शांति आएगी।

मध्यस्थता में किन देशों की रही मुख्य भूमिका?

इस बड़े युद्ध को रोकने में कई देशों ने मिलकर प्रयास किए हैं। पाकिस्तान और कतर के वार्ताकारों ने तेहरान में लगातार बैठकें की हैं जिससे बातचीत को रफ्तार मिली है। इस शांति प्रक्रिया में मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है:

  • पाकिस्तान: जिसने शुरुआती दो सप्ताह के सीजफायर और हालिया वार्ताओं में मुख्य कड़ी की भूमिका निभाई है।
  • कतर, सऊदी अरब और यूएई: इन खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमलों को आगे के लिए टाला है।
  • मिस्र और तुर्की: ये देश भी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए लगातार बातचीत का हिस्सा बने हुए हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कितने दिनों के लिए बढ़ सकता है?

मध्यस्थों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति बनने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होगा।

इस समझौते में सऊदी अरब और यूएई की क्या भूमिका है?

सऊदी अरब, कतर और यूएई के विशेष अनुरोध पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले नए हमलों को रोक दिया है ताकि शांति वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com