US-Iran Ceasefire Update: ट्रंप ने ईरान के साथ सीज़फायर बढ़ाया, पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ फैसला, लेकिन बातचीत पर सस्पेंस
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे सीज़फायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गुज़ारिश पर लिया गया। इस बीच, पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता और उससे जुड़े वीडियो को लेकर काफी उलझन बनी हुई है।
सीज़फायर को आगे क्यों बढ़ाया गया और इसमें किसका हाथ था?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार और बुधवार को सीज़फायर बढ़ाने का ऐलान किया। असल में 8 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ दो हफ्ते का सीज़फायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला था। ट्रंप ने बताया कि ईरान की सरकार इस समय अंदरूनी तौर पर बंटी हुई है, इसलिए उन्हें समय दिया गया है ताकि तेहरान एक ठोस प्रस्ताव तैयार कर सके। इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने बीच-बचाव करने वाली भूमिका निभाई है और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
क्या पाकिस्तान में ट्रंप और ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई?
- इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर होना था।
- अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance को करना था, लेकिन उनका दौरा 22 अप्रैल को टाल दिया गया।
- IRNA न्यूज़ एजेंसी ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने पाकिस्तान में बातचीत के लिए कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा है।
- सोशल मीडिया पर ट्रंप के ईरानी प्रतिनिधियों से बात करने के वीडियो की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर ऐसी किसी मुलाकात या वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव के क्या कारण हैं?
एक तरफ सीज़फायर बढ़ा है, तो दूसरी तरफ तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है, जिसे IRNA ने युद्ध अपराध बताया है। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक कंटेनर शिप पर हमला किया, जिससे जहाज़ के ब्रिज को नुकसान पहुँचा। ईरान का दावा है कि अमेरिका की नाकेबंदी से उनके खाने-पीने की चीज़ों पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 85% कृषि उत्पाद देश के अंदर ही पैदा होते हैं। इसके अलावा, लेबनान में इसराइली ड्रोन हमले और ईरान द्वारा एक जासूस को फांसी देने की खबरें भी सामने आई हैं।