अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से युद्धविराम चल रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शांति बहुत कम समय के लिए हो सकती है। जेरूसलम सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड फॉरेन अफेयर्स के डायरेक्टर सागीव स्टेनबर्ग ने चेतावनी दी है कि हालात किसी भी पल बिगड़ सकते हैं। उन्होंने इस्लामाबाद में चल रही बातचीत के नतीजों पर भी शक जताया है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है मामला
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 से दो हफ्ते का युद्धविराम लागू हुआ था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसे काफी नाजुक बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर डील नहीं हुई तो अंजाम बुरा होगा। फिलहाल व्हाइट हाउस ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया है।
इसराइल और लेबनान में क्या चल रहा है
इसराइल ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का समर्थन तो किया है, लेकिन वह लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि लेबनान बॉर्डर पर कोई युद्धविराम नहीं है। इसराइल अब लेबनान सरकार के साथ हिज़्बुल्लाह को निशस्त्र करने और एक शांति समझौते के लिए सीधी बातचीत करना चाहता है।
ईरान की शर्त और पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है और इस्लामाबाद में बातचीत चल रही है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि अगर लेबनान में इसराइल के हमले नहीं रुके, तो वह इन बातचीत से बाहर निकल सकता है। ईरान का मानना है कि अमेरिका इसराइल को रोकने में नाकाम रहा है, इसलिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रख सकता है।
