अमेरिका और ईरान के बीच करीब साढ़े तीन महीने से चल रही जंग अब थम गई है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम (ceasefire) का समझौता हुआ है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद कुवैत के विदेश मंत्री और तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने फोन पर बातचीत की और क्षेत्रीय हालातों पर चर्चा की।
📰: Makkah: पवित्र काबा को नए किसवा से सजाने की तैयारी शुरू, 16 जून को पहली मुहर्रम पर बदलेगा कवर।
युद्धविराम और मुख्य फैसले
यह समझौता 14 और 15 जून 2026 के बीच फाइनल हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस डील की जानकारी देते हुए बताया कि इससे क्षेत्र में सुरक्षा आएगी। उन्होंने Strait of Hormuz को तुरंत खोलने और नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश दिया है।
ईरान की तरफ से कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कन्फर्म किया कि सोमवार, 15 जून से सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान बंद हो जाएंगे, जिसमें लेबनान भी शामिल है। इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।
समझौते के तहत क्या मिलेगा
इस डील में कुछ अहम वित्तीय और रणनीतिक बातें शामिल हैं:
- अमेरिका एक तय समय के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को हटाएगा।
- ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति वापस की जाएगी।
- अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के पुनर्निर्माण के लिए एक प्लान तैयार किया जाएगा।
- परमाणु मुद्दों और अन्य प्रतिबंधों पर बातचीत आगे के दौर में होगी।
कुवैत और तुर्की की प्रतिक्रिया
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते का स्वागत किया है। मंत्रालय ने कहा कि सभी देशों को अब बातचीत के जरिए मसले सुलझाने चाहिए ताकि क्षेत्र में आपसी सम्मान और भाईचारा बढ़े।
वहीं, तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से बात की। Fidan ने इस समझौते पर खुशी जताई और उम्मीद की कि आने वाली बातचीत के नतीजे भी सकारात्मक होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई से बचना होगा ताकि यह शांति बनी रहे। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ के रूप में अहम भूमिका निभाई है।