अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने का समझौता हुआ था, लेकिन लेबनान में हालात अभी भी खराब हैं। इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच फिर से हमले शुरू हो गए हैं, जिससे कई लोगों की जान गई है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या यह शांति समझौता वाकई काम करेगा या क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा।

क्या था अमेरिका और ईरान का समझौता

बता दें कि 16 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस डील में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर, खासकर लेबनान में, सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई थी। यह एक अंतरिम समझौता है जो 60 दिनों के लिए लागू किया गया है ताकि अंतिम समाधान निकाला जा सके।

लेबनान में ताजा हालात और हमले

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के बावजूद लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में हिंसा जारी है। 18 जून 2026 को इसराइल के ड्रोन हमलों में कई लोग मारे गए।

  • Kfar Tebnit के पास एक कार पर ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हुई।
  • Zabadin में हुए हमले में कम से कम एक व्यक्ति मारा गया।
  • Beit Yahoun में हुए ड्रोन हमले में दो लोग घायल हुए।

इन हमलों के जवाब में हिजबुल्लाह ने भी पलटवार किया है। इसराइल की सेना ने माना है कि हिजबुल्लाह के दो हमलों में उनका एक सैनिक मारा गया और कुछ अन्य घायल हुए।

नेताओं के कड़े बयान

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा है कि इसराइल लेबनान और सीरिया के इलाकों में अपना कब्जा जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सेना लेबनान में रहेगी और वे पूरी ताकत के साथ हमले करना जारी रखेंगे।

वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी है कि इसराइल को लेबनान पर हमले तुरंत बंद करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लागू करने की जिम्मेदारी अमेरिका की है और लेबनान पर कब्जा करना समझौते का उल्लंघन होगा।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की राय

संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने बताया कि रविवार को दागे गए प्रोजेक्टाइल्स की संख्या 705 से घटकर 174 रह गई है, जिससे हिंसा में कुछ कमी आई है। दूसरी ओर, Amnesty International की महासचिव Agnès Callamard ने आगाह किया कि अगर इस समझौते में मानवाधिकारों को नजरअंदाज किया गया, तो यह केवल दमन और कब्जे को छिपाने का एक जरिया बनकर रह जाएगा।

सीमा पर बढ़ता तनाव

इसराइल की सेना ने एक नक्शा जारी किया है, जिससे पता चलता है कि उनके सैनिक लेबनान की सीमा के अंदर लगभग 10 किलोमीटर तक दाखिल हो चुके हैं। यह कदम 2022 के लेबनान-इसराइल समुद्री समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है। हिजबुल्लाह ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह एकतरफा युद्धविराम स्वीकार नहीं करेगा और न ही अपने हथियारों को छोड़ेगा।