अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थाई युद्धविराम (ceasefire) हुआ है, जिसका कतर और ब्रिटेन ने स्वागत किया है। हालांकि, यह शांति काफी नाजुक है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव अब भी बना हुआ है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस दौरान दोहा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्रीय शांति की अपील की।
अमेरिका और ईरान के बीच ceasefire की क्या स्थिति है?
अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के ceasefire पर सहमति जताई है, जिसमें पाकिस्तान ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही में बाधा आई, तो बड़े हमले हो सकते हैं। फिलहाल यह समुद्री रास्ता बंद है और दोनों देश एक-दूसरे पर ceasefire की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
कतर और ब्रिटेन ने क्या कहा?
कतर ने इस ceasefire को तनाव कम करने की दिशा में पहला कदम बताया है और ईरान से समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की अपील की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस मामले पर चर्चा करने के लिए दोहा पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेल की सप्लाई बहाल करने और स्थायी शांति लाने के लिए अभी और काम करना बाकी है।
इस विवाद में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
इस पूरे मामले में कई देशों की भूमिका अहम है, जिसे नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:
| देश/संस्था | भूमिका/स्थिति |
|---|---|
| अमेरिका | ट्रंप ने ceasefire का स्वागत किया लेकिन ईरान को सख्त चेतावनी दी |
| ईरान | Revolutionary Guard ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री माइन डालने की बात कही |
| कतर | तनाव कम करने की अपील की और शांति समझौते का स्वागत किया |
| ब्रिटेन | पीएम स्टार्मर ने दोहा हमलों की निंदा की और शांति के लिए दौरा किया |
| पाकिस्तान | दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई |
| लेबनान | ब्रिटिश विदेश मंत्री ने यहाँ भी ceasefire लागू करने की मांग की |