अमेरिका और ईरान के बीच हुए ceasefire के बाद अब वहां की राजनीति और कानून को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि युद्ध रुकने के कारण सैनिकों की वापसी की समय सीमा अब लागू नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर कई बड़े नेता और कानूनी जानकार इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। इस पूरे मामले ने अब एक गंभीर कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है।

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War Powers Act क्या है और क्यों मचा है शोर

अमेरिका में 1973 का एक कानून है जिसे War Powers Resolution कहा जाता है। इस नियम के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति किसी सैन्य कार्रवाई को शुरू करते हैं, तो उन्हें 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को इसकी जानकारी देनी होती है। इसके बाद 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से मंजूरी लेनी पड़ती है, वरना सैनिकों को वापस बुलाना जरूरी होता है। इस मामले में 1 मई 2026 की तारीख को अंतिम समय सीमा माना जा रहा था, लेकिन अब सरकार इसे टालने की कोशिश कर रही है।

रक्षा सचिव के दावे और नेताओं की आपत्ति

अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने सीनेट कमेटी के सामने गवाही देते हुए कहा कि चूंकि 8 अप्रैल से ceasefire लागू है, इसलिए कानून की घड़ी रुक गई है। उनका तर्क है कि जब सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही, तो समय सीमा की जरूरत नहीं है। हालांकि, Senator Tim Kaine और Senator Susan Collins जैसे नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह कानून एक अनिवार्य जरूरत है, कोई सुझाव नहीं। कानूनी एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि ceasefire से समय सीमा पर कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि अमेरिकी सेना अभी भी Strait of Hormuz के पास सक्रिय है और वहां समुद्री नाकाबंदी जारी है।

  • रक्षा सचिव Pete Hegseth: का कहना है कि युद्ध रुकने से डेडलाइन रुक गई है।
  • Senator Susan Collins: के मुताबिक 60 दिन की समय सीमा एक कानूनी अनिवार्यता है।
  • House Speaker Mike Johnson: ने सरकार के इस विचार का समर्थन किया है कि फिलहाल शांति बनाने की कोशिश जारी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

War Powers Act की डेडलाइन क्या थी

इस कानून के तहत सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेने या सैनिकों को वापस बुलाने की आखिरी तारीख 1 मई 2026 थी।

विवाद की मुख्य वजह क्या है

विवाद इस बात पर है कि क्या 8 अप्रैल को लागू हुए ceasefire ने 60 दिन की कानूनी समय सीमा को रोक दिया है या यह अभी भी जारी है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.