अमेरिका और ईरान के बीच Strait of Hormuz को लेकर विवाद गहरा गया है। दोनों देश इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के इस्तेमाल और कंट्रोल को लेकर अलग-अलग बातें कह रहे हैं। तनाव इतना बढ़ गया है कि अब दोनों तरफ से धमकियां मिल रही हैं और बीच-बचाव की कोशिशें तेज हो गई हैं।
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अमेरिका की मांग है कि ईरान इस रास्ते को सभी जहाजों के लिए खुला रखे, कमर्शियल जहाजों पर हमले बंद करे और आने-जाने के लिए कोई टैक्स न ले। वहीं ईरान का कहना है कि इस रास्ते पर उसका पूरा कंट्रोल रहेगा और वह अपनी मर्जी से फीस लेगा और सुरक्षा तय करेगा। जून 2026 में हुए युद्धविराम समझौते को अमेरिका ने अब खत्म घोषित कर दिया है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी कि अगर उन पर कोई हमला हुआ तो वो 1000 मिसाइलें दाग देंगे। दूसरी तरफ, ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने 11 जुलाई 2026 को अपने पिता की मौत का बदला लेने की बात कही है। इन झड़पों की वजह से 8 जुलाई से इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है।
हमले और जान-माल का नुकसान
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में 17 लोग मारे गए और 115 लोग घायल हुए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने इसके जवाब में Bahrain, Jordan, Kuwait और Qatar को निशाना बनाया है।
बातचीत और कूटनीतिक कोशिशें
इतने तनाव के बीच भी बातचीत के रास्ते खुले हैं। 11 जुलाई को अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि Oman में मिले। इससे पहले 10 जुलाई को कतर के मध्यस्थों ने भी ईरान के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने उम्मीद जताई है कि इस वीकेंड तक कोई हल निकल सकता है।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका पर नए प्रतिबंध लगाकर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के अंदर कट्टरपंथियों और नरम दल के बीच सत्ता की लड़ाई चल रही है, जिसकी वजह से किसी भी समझौते को लागू करना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, गुप्त तौर पर ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका को बताया था कि जहाजों पर हुए हमले एक गलती थी और इसे कुछ कट्टरपंथियों ने किया था। व्हाइट हाउस ने इस बात को 11 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक रूप से मानने को कहा है ताकि आगे की बातचीत हो सके।
