खाड़ी क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अमेरिका व ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव की शुरुआत हो चुकी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले करने के बाद, ईरान ने भी बड़ा पलटवार किया है। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इस हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल है।
अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?
यह पूरा मामला 8 जून 2026 को शुरू हुआ जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सेना का एक Apache हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। अमेरिका का आरोप है कि ईरान के एक शाहेद ड्रोन की वजह से यह हादसा हुआ। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्रवाई के आदेश दिए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के हवाई सुरक्षा सिस्टम, रडार और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों सहित करीब 20 ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इसे आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बताया है।
ईरान का पलटवार: किन-किन जगहों को बनाया निशाना?
अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी बड़ा जवाबी हमला किया। ईरान के सैन्य मुख्यालय ने अमेरिकी हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया और कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इस सैन्य टकराव से जुड़े मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
- ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में कुल 21 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।
- बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस पर हमले की खबरें हैं।
- जॉर्डन की सेना ने अपने हवाई क्षेत्र में आने वाली 5 ईरानी मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।
- कुवैत और बहरीन में हमलों के दौरान सुरक्षा के लिए हवाई हमले के सायरन बजाए गए।
- ईरान ने बुशहर प्रांत के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है।
- अमेरिकी हमलों के कारण दक्षिणी ईरान में पानी के दो बड़े जलाशयों को नुकसान पहुंचा है, जिससे हजारों लोगों के पास पीने के पानी की किल्लत हो गई है।
इस टकराव का खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
इस सैन्य टकराव के बाद बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले विदेशी प्रवासियों, खासकर भारतीय नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी या इजरायली हरकतों के लिए न होने दें। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्शची ने विदेशी सेनाओं को सुरक्षित रहने के लिए क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी चेतावनी दी है कि यह स्थिति बड़े युद्ध में बदल सकती है। फिलहाल कतर के मध्यस्थ बातचीत के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश में जुटे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव की मुख्य वजह क्या है?
8 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सेना का अपाचे हेलीकॉप्टर गिर गया था। अमेरिका का दावा है कि इसे ईरानी ड्रोन ने गिराया था, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान के रडार और एयर डिफेंस ठिकानों पर हवाई हमले किए।
ईरान ने किन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है?
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस और जॉर्डन के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
