अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल में हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह टूट चुका है और दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। यह ताजा विवाद 9 जून को शुरू हुआ जब ईरान के एक ड्रोन ने अमेरिका के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया। इसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की और फिर ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। इस बड़े सैन्य टकराव के बीच रूस ने दोनों देशों से शांत रहने और सैन्य हमले तुरंत रोकने की अपील की है।

ℹ: अमेरिका और ईरान की जंग में घिरे कुवैत, बहरीन और जॉर्डन, ईरान ने दागे कई मिसाइल और ड्रोन, मची अफरातफरी

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा विवाद की मुख्य वजह क्या है?

इस पूरे तनाव की शुरुआत 9 जून 2026 को हुई जब Strait of Hormuz के पास अमेरिका का एक Apache हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि इस हेलीकॉप्टर को ईरान के Shahed ड्रोन ने मार गिराया था। हालांकि, हेलीकॉप्टर के दोनों पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दक्षिणी ईरान में करीब 20 ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के हवाई रक्षा तंत्र, रडार साइट्स और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों को निशाना बनाया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा की जा सके।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में किन देशों पर किए हमले?

अमेरिका के हवाई हमलों के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़े हमले किए। ईरान ने दावा किया है कि उसने कुल 21 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें कुवैत का अली अल सलेम (Ali Al Salem) बेस और जॉर्डन का अल-अज़राक (Al-Azraq) बेस शामिल हैं। जॉर्डन की सेना ने कुछ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की बात कही है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा में की गई है। साथ ही ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें।

रूस और अन्य देशों का इस तनाव पर क्या कहना है?

इस बड़े सैन्य टकराव पर रूस ने गहरी चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखरोवा ने दोनों पक्षों से तुरंत हमले रोकने और शांति बरतने की अपील की है। रूस ने कहा है कि नागरिक ठिकानों पर हमला किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस तनाव ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान ने इस साल 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम कराया था, जिसे बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था, लेकिन अब यह शांति समझौता पूरी तरह बेअसर साबित हो चुका है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस हमले में कुवैत और जॉर्डन के अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया गया है?

ईरान की सेना IRGC ने कुवैत के अली अल सलेम बेस और जॉर्डन के अल-अज़राक बेस समेत 21 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। जॉर्डन ने इसमें से कुछ मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था।

ताजा अमेरिकी और ईरानी हमलों की मुख्य वजह क्या थी?

इसकी शुरुआत 9 जून को हुई जब ईरान के ड्रोन ने Strait of Hormuz के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिरा दिया था, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हमले किए और फिर ईरान ने अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइलें दागीं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.