अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब समुद्र तक पहुँच गया है, जहाँ दोनों देश एक-दूसरे के कमर्शियल जहाजों को पकड़ रहे हैं। इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (ICS) ने इस खींचतान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि राजनीतिक रंजिश निकालने के लिए जहाजों को जब्त करना गलत है। संस्था ने मांग की है कि पकड़े गए सभी जहाजों और उनके क्रू मेंबर्स को तुरंत रिहा किया जाए।

किन जहाजों को किसने पकड़ा और क्या है पूरा मामला?

इस विवाद में दोनों देशों ने कई बड़े जहाजों को अपने कब्जे में लिया है। अमेरिका ने 19 अप्रैल को M/V Touska और 23 अप्रैल को M/T Majestic X समेत कुछ अन्य ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को पकड़ा। जवाब में ईरान ने 22 और 23 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में MSC Francesca और Epaminondas नाम के दो कंटेनर जहाजों को जब्त कर लिया। इन जहाजों पर फिलिपींस, यूक्रेन, क्रोएशिया और मोंटेनेग्रो के नाविक सवार थे, जो फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

  • इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (ICS): इसने इन कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और नेविगेशन की आज़ादी पर हमला बताया है।
  • IMO: इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के महासचिव ने इन हमलों को अस्वीकार्य बताया और जहाजों को तुरंत छोड़ने की अपील की।
  • पनामा सरकार: पनामा ने ईरान द्वारा अपने झंडे वाले जहाज MSC Francesca को पकड़ने की निंदा की और इसे समुद्री सुरक्षा पर हमला कहा।
  • ईरान और अमेरिका: ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को कानून का उल्लंघन बताया, जबकि अमेरिका ने कहा कि यह अवैध नेटवर्क को रोकने के लिए किया गया ग्लोबल मैरीटाइम एनफोर्समेंट है।

समुद्री व्यापार और आम जहाजरानी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस विवाद के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहाँ तनाव बढ़ने से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। हालांकि अमेरिका ने शांति वार्ता के लिए युद्धविराम की बात कही थी, लेकिन इन जब्तियों ने राजनयिक कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है।