अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक सीधा संचार माध्यम शुरू किया है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस कोशिश का मकसद दोनों देशों के बीच किसी भी गलतफहमी को रोकना और हादसों से बचना है। यह फैसला स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद लिया गया।

स्विट्जरलैंड में हुई बड़ी मीटिंग

सोमवार, 22 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ। इससे पहले पिछले हफ्ते एक 14 पॉइंट के समझौते (MoU) पर दस्तखत हुए थे, जिसके तहत 60 दिनों तक बातचीत करने का समय तय किया गया है। यह चर्चाएं इस हफ्ते 28 जून तक जारी रहेंगी।

समझौते की मुख्य बातें

  • सीधा संपर्क: दोनों देशों के बीच एक डायरेक्ट लाइन बनाई गई है ताकि कमर्शियल जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे।
  • हाई-लेवल कमेटी: इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई है, जो परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और विवादों को सुलझाने पर काम करेगी।
  • लेबनान मामला: लेबनान में सैन्य अभियानों को खत्म करने के लिए अमेरिका, ईरान और लेबनान के बीच एक स्पेशल सेल बनाया जाएगा।
  • ब्लॉकडाउन खत्म करना: समझौते के मुताबिक अमेरिका 30 दिनों के भीतर अपना नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह खत्म करेगा, जबकि ईरान 60 दिनों तक जहाजों के सुरक्षित रास्ते की गारंटी देगा।

नेताओं की मौजूदगी और तनाव

अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति JD Vance, राष्ट्रपति के दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शामिल थे। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने हिस्सा लिया। हालांकि, बीच में तनाव भी बढ़ा जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करने या बमबारी करने की धमकी दी, जिसके कारण ईरानी अधिकारी कुछ समय के लिए मीटिंग से बाहर चले गए थे।

अभी क्या है जमीनी स्थिति

समझौते के बावजूद मिलिट्री सूत्रों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है। ईरान की IRGC ने अभी तक जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी है। बताया जा रहा है कि लेबनान में इजरायल के हमलों और अमेरिका द्वारा समझौते को पूरी तरह लागू न करने की वजह से ईरान ने अभी रास्ता नहीं खोला है।