मिडिल ईस्ट में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका के CENTCOM ने जानकारी दी कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हवाई हमले किए हैं। ये कार्रवाई 23 जुलाई 2026 को हुई। अमेरिका का कहना है कि वे इन हमलों के जरिए ईरान के उस खतरे को कम करना चाहते हैं जो वहां के व्यापारिक जहाजों और समुद्री रास्तों के लिए पैदा हो रहा है।
हमलों का दायरा और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेना ने ईरान की मिसाइल, ड्रोन स्टोरेज और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी है, जिससे अब तक 12 कमर्शियल जहाज रास्ता बदलने को मजबूर हुए हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इस तनाव के चलते अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 1st Lt. Tyler James Feehan और Pvt. Isabella Gonzales शामिल हैं।
युद्ध का बढ़ता खर्च और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने सऊदी अरब के जहाजों या होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज को नुकसान पहुंचाया, तो अमेरिका ईरान की नागरिक सुविधाओं जैसे ब्रिज या पावर प्लांट को भी निशाना बना सकता है। डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth के अनुसार, इस युद्ध पर अब तक $37.5 बिलियन का खर्च हो चुका है। फिलहाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने 50,000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात रखा है और स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
