अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिनों का सीजफायर समझौता महज तीन हफ्ते में ही टूट गया है। 8 जुलाई 2026 से दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और मिसाइल व हवाई हमलों का दौर शुरू हो गया है। इस स्थिति ने खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका को गहरा कर दिया है।
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तनाव की मुख्य वजह और ताजा हालात
अमेरिकी सेना CENTCOM ने ईरान के ठिकानों पर नए हमले किए हैं। इनका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की दखलअंदाजी को रोकना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि अब बातचीत का कोई मतलब नहीं है और अमेरिका होर्मुज के रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। इस दौरान अमेरिका के हमलों में दक्षिण-पश्चिम ईरान में दो लोगों की मौत की खबर है।
वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। ईरान ने ओमान में भी रडार सिस्टम को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसने होर्मुज में दो जहाजों को रोका है, हालांकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सोमवार को हुए एक अमेरिकी हमले में एक व्यक्ति की मौत और सात लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।
क्षेत्रीय व्यापार पर असर
तनाव के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाला समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। संघर्ष से पहले यहाँ रोजाना 130 से अधिक जहाज गुजरते थे, जिनकी संख्या घटकर अब महज 22 रह गई है। ईरान के बंदर अब्बास और केश्म द्वीप पर भी धमाकों की आवाज सुनी गई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने दोनों देशों से हमले रोकने और बातचीत की मेज पर वापस आने की अपील की है। इसके अलावा, यूके ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन की सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
