मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ गया है। 16 जुलाई 2026 को अमेरिका की CENTCOM ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने शामिल थे। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद से यह दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष का एक नया हिस्सा है।
हमलों का मकसद और मौजूदा स्थिति
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, इन स्ट्राइक का मुख्य मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना था। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने आरोप लगाया कि ईरान लगातार दूसरे देशों और नागरिकों को निशाना बना रहा है। अमेरिकी सेना ने एक कुराकाओ-झंडा लगे M/T Belma तेल टैंकर को भी तब रोक दिया जब उसने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की।
ईरान का जवाब और जान-माल का नुकसान
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि उनका ध्यान अमेरिकी सैन्य ढांचे को खत्म करने पर है। ईरानी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास, रस्क, चाबहार, कशम और बुशहर जैसे शहरों में धमाके हुए हैं। बुशहर में ईरान का एकमात्र परमाणु संयंत्र भी स्थित है। ईरानी अधिकारियों ने जानकारी दी कि इन हमलों में 30 नागरिक और सात सैन्यकर्मी मारे गए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है और उनका कहना है कि वे केवल देश की रक्षा पर ध्यान दे रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान शांति वार्ता में सहयोग नहीं करता है, तो हमले और तेज किए जाएंगे। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि ये हमले UN Charter का उल्लंघन करते हैं, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे इजराइल और अमेरिका के आत्मरक्षा के अधिकार के तहत सही ठहराया है।
