अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष लगातार भयावह होता जा रहा है। 17 जुलाई 2026 तक अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान पर सैन्य हमले जारी रखे हैं। जून महीने में हुआ अस्थायी युद्धविराम पूरी तरह से खत्म हो चुका है, जिसके बाद से क्षेत्र में हिंसा बढ़ गई है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ताज़ा हमलों में 3 लोगों की जान गई है और अब तक कुल 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
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हमलों का दायरा और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर ये हमले किए गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य साजो-सामान को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि Iranshahr एयरपोर्ट और Bandar Abbas के रेलवे स्टेशन पर भी हमले हुए हैं। अमेरिका ने फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों पर नौसेना नाकाबंदी लगा दी है और वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को रोका जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। Jordan की सेना ने 8 मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। साथ ही, Kuwait और Bahrain ने भी अपने क्षेत्रों में दुश्मन ड्रोन का सामना करने की सूचना दी है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बुनियादी ढांचे पर हमला जारी रहा, तो वे पूरे क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएंगे। इस तनाव के चलते International Energy Agency (IEA) ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।
