अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने जानकारी दी है कि इस युद्ध पर अब तक अमेरिका 37.5 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। आने वाले समय में खर्चों को संभालने के लिए सरकार ने संसद से 67.1 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। यह रकम कुल 87.6 बिलियन डॉलर के एक बड़े प्रस्ताव का हिस्सा है।
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युद्ध का बढ़ता दायरा और चिंता
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह पैसा सेना की तैयारी और हथियारों को फिर से भरने के लिए बहुत जरूरी है। अगर यह बजट नहीं मिलता है, तो सेना की ट्रेनिंग और तैयारियों पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी संसद में कई सदस्य इस बढ़ते खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं और सरकार की रणनीति पर असहमति जता रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने भी चेतावनी दी है कि अगर लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों पर हमले जारी रहे, तो ईरान और हूती विद्रोहियों को बड़ा सैन्य दंड दिया जाएगा।
क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों का हाल
तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी दिख रहा है। 24 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने लगातार 13वीं रात ईरान के ड्रोन ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान की ओर से बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का दावा किया गया है। साथ ही, कुवैत में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले की बात सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी देश अमेरिका की मदद करेगा, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
