अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है और अप्रैल से चला आ रहा युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी है, जिसके जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। इस टकराव के कारण खाड़ी देशों में असुरक्षा का माहौल है और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी हमले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 जून 2026 को ऐलान किया कि अमेरिका आज रात ईरान पर बहुत बड़ा हमला करेगा। इस हमले में खार्ग आइलैंड और ईरान के तेल और गैस बाजारों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे पहले 10 जून को अमेरिका ने तेहरान के आसपास सैन्य निगरानी और संचार प्रणालियों पर हमले किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण ईरान में पीने के पानी की सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया।
ईरान का पलटवार और चेतावनी
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने चेतावनी दी कि गलत रणनीतियों और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से स्थिति और खराब होगी। उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा बुनियादी ढांचा तबाह हो जाएगा और एक ऐसा दलदल बनेगा जिसमें दुनिया सालों तक फंसी रहेगी। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। इस वजह से कुवैत ने कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था।
शिपिंग पर असर और भारतीयों का नुकसान
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद कर दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यहाँ से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। वहीं, अमेरिका द्वारा ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर किए गए हमलों में तीन भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई, जिससे भारत में भी चिंता बढ़ गई है।
क्षेत्रीय प्रभाव और अन्य घटनाएँ
- ओमान के तट पर ईरान ने एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया।
- ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को अवैध और आपराधिक बताया।
- संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
