US-Iran War Impact: अमेरिका और ईरान की जंग से कंबोडिया के गरीब बच्चों की पढ़ाई पर संकट, महंगे ईंधन ने रोके स्कूल के रास्ते।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब दुनिया भर के गरीब बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ने लगी है। 19 अगस्त 2026 तक आते-आते इस संघर्ष को पूरे छह महीने हो चुके हैं और इसका असर एशिया के दूरदराज इलाकों तक साफ दिखाई दे रहा है। ग्लोबल मार्केट में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर कंबोडिया के गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। हालात यह हो गए हैं कि कई परिवारों को अपने बच्चों को स्कूल भेजना नामुमकिन लग रहा है और उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर काम पर जाना पड़ रहा है।
नाव का सफर और स्कूल की दूरी
कंबोडिया के टोनले सेप झील के पास रहने वाले बच्चों के लिए स्कूल जाना आसान नहीं है। वहां के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। ईंधन के दाम बढ़ने से नाव से स्कूल आने-जाने का खर्च इतना ज्यादा बढ़ गया है कि गरीब माता-पिता इसे उठा पाने में असमर्थ हैं। 13 साल की सोउ स्रेयनिच जैसी कई छात्राएं अब स्कूल जाने के बजाय काम करने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके परिवार के पास रोज आने-जाने का किराया देने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। जानकारों का कहना है कि घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर माता-पिता को यह तय करना पड़ रहा है कि वे किस बच्चे को पढ़ाएं और किसे घर की आमदनी के लिए काम पर भेजें।
संस्थानों पर भी पड़ रहा है भारी असर
इस संकट का असर सिर्फ बच्चों के घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों और संस्थाओं पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ब्लू ड्रैगन फाउंडेशन के संस्थापक माइकल ब्रोसowski ने इस बात पर चिंता जताई है कि कैसे परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कड़े फैसले लेने पर मजबूर हैं। इसके अलावा, गैर-सरकारी संगठन 'Aide et Action' से जुड़े सम्फोर्स वोर्न ने बताया कि बिजली के दाम बढ़ने की वजह से स्कूलों की प्रयोगशालाओं का बजट भी बिगड़ गया है। ईंधन महंगा होने की वजह से सरकार और राहत कार्यों से जुड़े लोग भी दूरदराज के गांवों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा का नुकसान और ज्यादा बढ़ गया है।
UNICEF की बड़ी चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव
बच्चों के हालातों को लेकर यूनिसेफ ने एक बहुत बड़ी चेतावनी जारी की है। संस्था का कहना है कि अगर यह युद्ध और ज्यादा लंबा खिंचा, तो इस साल के अंत तक दुनिया भर में 23.4 मिलियन यानी करीब दो करोड़ तीस लाख से ज्यादा बच्चे गरीबी के दलदल में धकेले जा सकते हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत मामले अकेले अफ्रीका और एशिया महाद्वीप से जुड़े होंगे। दूसरी तरफ, खाड़ी देशों में भी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 19 अगस्त 2026 को यूएई ने ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का गंभीर आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और वित्तीय लेन-देन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ईरान ने भी गल्फ देशों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी सैन्य अभियानों का साथ न दें। इस बढ़ते तनाव और महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर के आम लोग और गरीब परिवार पिस रहे हैं।