ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। US Central Command (CENTCOM) ने ईरान पर लगातार दसवीं रात भी हमले किए हैं। ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कम करने के लिए किए जा रहे हैं जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाती हैं। इस संघर्ष में अब तक 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और अमेरिका ने बदला लेने की कसम खाई है।
लगातार हो रहे हमले और बढ़ता तनाव
सोमवार 20 जुलाई 2026 को अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया। जवाब में ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने ‘ऑपरेशन नस्र-2’ के तहत हमले किए। ईरान की तरफ से जॉर्डन, बहरीन और कुवैत की ओर भी मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें वहां की सुरक्षा सेनाओं ने इंटरसेप्ट किया। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA ने तबरिज़ के पास एक व्यक्ति की मौत और कई बंदरगाहों पर हमले की पुष्टि की है।
आम लोगों पर असर और आर्थिक संकट
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इसे पूर्ण युद्ध करार दिया है। इस तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ रहा है और Brent crude oil की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी है, जिससे समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के माध्यम से शांति की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
