अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 14 जुलाई 2026 को ईरान के कई शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। यह लगातार तीसरी रात है जब अमेरिकी सेना ने बसहेयर, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे इलाकों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इन हमलों की मंजूरी दी है और कहा कि अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। इस हमले में अमेरिकी सेना ने पहली बार समुद्र में चलने वाले ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ का उपयोग करते हुए बंदर अब्बास बेस पर स्थित सबमरीन और जहाज रखरखाव केंद्र को नुकसान पहुंचाया है।
🚨: Middle East में बढ़ा तनाव: अमेरिका के 50,000 जवान तैनात, ईरान के ठिकानों पर फिर किए हमले।
समुद्री नाकेबंदी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर असर
अमेरिकी प्रशासन ने 14 जुलाई 2026 को शाम 4 बजे से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक बार फिर समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। साथ ही, राष्ट्रपति Donald Trump ने इस रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20% का अतिरिक्त टोल लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले से क्षेत्र में व्यापारिक आवाजाही पर गहरा असर पड़ सकता है। पेंटागन को कांग्रेस की मंजूरी के बिना क्षेत्र में 60 और दिनों तक सैन्य संचालन करने की अनुमति दे दी गई है।
ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चिंता
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका की इन कार्रवाइयों को ‘अपराधिक और भड़काऊ’ करार दिया है। ईरान का दावा है कि उनके रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जवाब में जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और ओमान में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने इस बढ़ते सैन्य टकराव पर गहरी चिंता जाहिर की है। फिलहाल, इन हमलों के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
