अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। 24 जुलाई 2026 को इराक की सीमा के पास ईरान के एक सुरक्षा ठिकाने पर हुए अमेरिकी हमले के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इस हमले में ईरान के अनुसार 2 लोगों की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है।
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क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया संकट
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत के अब्दाली बॉर्डर क्रॉसिंग को निशाना बनाया। साथ ही, ईरान की सेना ने बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन हमले किए। इन हमलों के कारण बहरीन और कुवैत में सायरन बज उठे। दोनों देशों की सेनाओं ने ईरान से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले को ऑपरेशन नसर 2 का हिस्सा बताया है।
अमेरिका और ईरान की सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 13वीं रात ईरान के ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने ईरान के ड्रोन, मिसाइल स्टोरेज और रडार साइटों को निशाना बनाने की बात कही है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका के मिसाइल हमलों से अहवाज के पास 4 लोगों की मौत हुई और 5 लोग घायल हुए। इसके अलावा खोर्रमबाद और बंदर अब्बास जैसे शहरों में भी नुकसान की खबरें हैं।
शांति वार्ता पर अनिश्चितता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि वे ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ देने की नीति अपना रहे हैं और अमेरिका के संघर्ष विराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने तेहरान का दौरा कर यह भरोसा दिलाया कि इराक की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अभी कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है।
