अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। 13 जुलाई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ युद्धविराम को समाप्त करने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का ऐलान किया। इस स्थिति के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जबकि सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले
अमेरिकी सैन्य कमान CENTCOM ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों में एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार साइटों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। पहली बार इन हमलों में अमेरिकी नौसेना ने आत्मघाती समुद्री और हवाई ड्रोन का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी सेना का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।
इसके जवाब में ईरान के Persian Gulf Strait Authority (PGSA) ने इस समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है। वहीं, IRGC ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और ओमान में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिसमें जॉर्डन का Prince Hassan Air Base भी शामिल है।
शांति वार्ता पर संकट
जून के मध्य में हुई शांति वार्ता और समझौता अब पूरी तरह विफल होता दिख रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि ईरान ने समझौते का पालन किया, जबकि अमेरिका ने शर्तों का उल्लंघन किया है। वर्तमान में कतर, पाकिस्तान और ओमान के जरिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद करने की घोषणा नहीं करते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
