अमेरिका और ईरान के बीच उपजा तनाव अब एक बार फिर खतरनाक रूप ले चुका है। 17 जून 2026 को हुई इस्लामाबाद मेमोरेंडम की शांति संधि के 30 दिन पूरे होते ही हालात बिगड़ गए हैं और अब दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो गई है। इसका सबसे बुरा असर होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जहाँ व्यापारिक जहाजों की आवाजाही ठप होने का खतरा बढ़ गया है।

सीजफायर क्यों हुआ फेल

8 जुलाई 2026 से ही सीजफायर के टूटने के संकेत मिलने लगे थे और 20 जुलाई तक स्थिति पूरी तरह से युद्ध में बदल गई। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय CENTCOM ने पुष्टि की है कि पिछले 9 से 10 दिनों से लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जा रहे हैं। बदले में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया है, जिसमें बंदर अब्बास बंदरगाह और केशम द्वीप पर धमाकों की खबरें हैं।

क्षेत्रीय देशों पर असर

इस लड़ाई की आग खाड़ी देशों तक भी पहुँच गई है। कुवैत और बहरीन ने ईरान की ओर से आए कई हमलों को हवा में ही नाकाम करने की जानकारी दी है। होरमुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के बाद चालक दल के सदस्यों को जान बचाकर जहाज छोड़ना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस महीने हुई 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत और लगभग 100 सैनिकों के घायल होने पर सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का कहना है कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल एक हथियार की तरह कर रहा है। फिलहाल पाकिस्तान और कतर के माध्यम से 10 दिन के युद्धविराम की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.