अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध की शक्ल ले चुका है। अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय इलाकों पर करीब 90 हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस लड़ाई की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है।
US Central Command (CENTCOM) ने 9 जुलाई 2026 को साफ तौर पर कहा कि ईरान का Strait of Hormuz पर कोई नियंत्रण नहीं है। अमेरिका ने इस बात को खारिज कर दिया कि यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी। अमेरिका के मुताबिक यह एक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्ता है और यहाँ जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के होना चाहिए।
तनाव इतना बढ़ गया कि अमेरिका ने 8 और 9 जुलाई की दरमियान ईरान के तटीय इलाकों में करीब 90 हमले किए। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स, नौसेना के ठिकानों और सैन्य रसद केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि ईरान व्यापारिक जहाजों और आम नागरिकों पर हमले न कर सके। यह हमला तब हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को ऐलान किया कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म हो चुका है।
ईरान ने इसका जवाब 9 जुलाई को दिया और कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। इस खींचतान का सीधा असर व्यापार पर पड़ा है। गुरुवार को इस रास्ते से केवल 6 टैंकर गुजरे, जबकि उससे पहले दिन 21 टैंकर निकले थे।
ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) का दावा है कि अमेरिका के हमलों की वजह से रास्ता खुलने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि अब केवल वही जहाज निकल पाएंगे जिन्हें ईरान से परमिट मिलेगा। दूसरी तरफ, अमेरिका का दावा है कि मई से अब तक उन्होंने 800 से ज्यादा जहाजों और 38 करोड़ बैरल कच्चे तेल को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की है।
इतना ही नहीं, 8 जुलाई को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के तेल निर्यात से जुड़ी विशेष छूट (General License X) को भी खत्म कर दिया है, जिससे ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लग गए हैं।
